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Coincidencias para "surendra mohan pathak"

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2019

HI

I am a khalsa of Waheguru. I am the Guru's lion. I'll thunder like the clouds and in the same booming voice, I will unleash havoc on my enemies. My enemies will tremble at my challenge. My scream will rain like cinders upon them.'Jaake Bairi Sanmukh Jeevay,Taake Jeevan Ko DhikkarThis electrifying novel will quake the gentle human sensibilities. The 44th mystery in the Vimal series this is a brand-new gem from the stellar mystery author, Surendra Mohan Pathak...

$1.47 USD

1905

HI

लोकप्रिय साहित्य हिन्दी अकादमिक जगत के लिए मूल्यांकन की चीज़ कभी नहीं रहा, लेकिन हिन्दी के शिक्षित समाज का बड़ा तबका उसके ही असर में रहता आया है। हमें लोकप्रिय साहित्य का बाज़ार तो दिखता है, उसकी आन्तरिक दुनिया की बनावट नहीं दिखती। ऐसे में लोकप्रिय लेखन के एक बड़े नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक अपनी आत्मकथा लिखकर बहस और मूल्यांकन की एक नई ज़मीन तैयार कर रहे हैं। उनका अपना जीवन है भी ऐसा जिसके बारे में दूसरों को दिलचस्पी हो। कान में सुनने की मशीन, आँखों पर मोटे लेंस का चश्मा लगाए, नौकरी करते हुए, ती...

1905

HI

लोकप्रिय फिक्शन के जादूगर कथाकार सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा के इस खंड में उनके जीवन के उस दौर का वर्णन है, जब वे पाठकों में व्यापक स्वीकृति और प्रसिद्धि पा चुके थे। यह उनका लेखकीय जीवन है जिसमें प्रकाशकों से उनके रिश्ते और प्रशंसकों-पाठकों की बातें आई हैं।गम्भीर और साहित्यिक हिन्दी समाज, लेखकों और पाठकों के लिए इस आत्मकथा से गुजरना निश्चय ही एक समानान्तर संसार में जाना होगा, लेकिन यह यात्रा लगभग जरूरी है। खास तौर पर यह जानने के लिए कि लेखन की वह प्रक्रिया कैसे चलती है जिसमें पा...

2022

HI

जो गम हद से ज्यादा हो, खुशी नजदीक होती है, चमकते हैं सितारे, रात जब तारीक होती है। जब नाम सोहल हो तो गिर गिर के संभलना पड़ता है। तो मर मर के जीना पड़ता है। कदम लड़खड़ाते हों तो भी मजबूती से पैरों पर खड़ा होना पड़ता है। नीलम की मौत ने उसके वजूद का पुर्जा पुर्जा बिखेर दिया था तो भी अपनी व्यक्तिगत त्रासदी से उबरना लाज़िम था। हँस कर दिखाना जरूरी था भले ही दिल रोता हो।

$1.47 USD