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Showing results for "premchand"

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2014

EN

होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा - गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले पाथ कर आई थी। बोली - अरे, कुछ रस-पानी तो कर लो। ऐसी जल्दी क्या है? होरी ने अपने झुर्रियों से भरे हुए माथे को सिकोड़ कर कहा - तुझे रस-पानी की पड़ी है, मुझे यह चिंता है कि अबेर हो गई तो मालिक से भेंट न होगी। असनान-पूजा करने लगेंगे, तो घंटों बैठे बीत जायगा। 'इसी से तो कहती हूँ, कुछ जलपान कर लो और आज न जाओगे तो कौन हर...


2013

EN

Godan, a story of stark realism is Premchand’s most outstanding work. It is his last completed novel which brings out the realistic interpretation of Indian village society. This is a story of people, hungry and semi starved, yet hopeful and optimistic in the truest spirit of the age it represent.

Price₹317.53

2016

EN

बेटोंवाली विधवापंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की क्वाँरी थी। संपत्ति भी काफी छोड़ी थी। एक पक्का मकान, दो बगीचे, कई हजार के गहने और बीस हजार नकद। विधवा फूलमती को शोक तो हुआ और कई दिन तक बेहाल पड़ी रही, लेकिन जवान बेटों को सामने देखकर उसे ढाढ़स हुआ। चारों लड़के एक-से-एक सुशील,चारों बहुएँ एक-से-एक बढ़कर आज्ञाकारिणी। जब वह रात को लेटती, तो चारों बारी-बारी से उसके पाँव दबातीं; वह स्ना...

2016

EN

मानसरोवर - भाग 4प्रेरणासद्गतितगादादो कब्रेंढपोरसंखडिमॉन्सट्रेशनदारोगाजीअभिलाषाखुचड़आगा-पीछाप्रेम का उदयसतीमृतक-भोजभूतसवा सेर गेहूँसभ्यता का रहस्यसमस्यादो सखियाँस्मृति का पुजारी------------------------मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधामी कोई लड़का न था, बल्कि यों कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मुझे ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से साबका न पड़ा था। कपट-क्रीड़ा में उसकी जान बसती थी। अध्यापकों को बनाने और चिढ़ाने, उद्योगी बालकों को छेड़ने और रुलाने में ही उसे आनन्द आता था। ऐसे-ऐसे षडयंत्र रचत...

2016

EN

घासवालीमुलिया हरी-हरी घास का गट्ठा लेकर आयी, तो उसका गेहुआँ रंग कुछ तमतमाया हुआ था और बड़ी-बड़ी मद-भरी आँखो में शंका समाई हुई थी। महावीर ने उसका तमतमाया हुआ चेहरा देखकर पूछा- क्या है मुलिया, आज कैसा जी है।मुलिया ने कुछ जवाब न दिया- उसकी आँखें डबडबा गयीं!महावीर ने समीप आकर पूछा- क्या हुआ है, बताती क्यों नहीं? किसी ने कुछ कहा है, अम्माँ ने डाँटा है, क्यों इतनी उदास है?मुलिया ने सिसककर कहा- कुछ नहीं, हुआ क्या है, अच्छी तो हूँ?महावीर ने मुलिया को सिर से पाँव तक देखकर कहा- चुपचाप रोयेगी, बतायेग...

2016

EN

मानसरोवर - भाग 3विश्वासनरक का मार्गस्त्री और पुरुषउध्दारनिर्वासननैराश्य लीलाकौशलस्वर्ग की देवीआधारएक आँच की कसरमाता का हृदयपरीक्षातेंतरनैराश्यदण्डधिक्कारलैलामुक्तिधनदीक्षाक्षमामनुष्य का परम धर्मगुरु-मंत्रसौभाग्य के कोड़ेविचित्र होलीमुक्ति-मार्गडिक्री के रुपयेशतरंज के खिलाड़ीवज्रपातसत्याग्रहभाड़े का टट्टूबाबाजी का भोगविनोद----------------------उन दिनों मिस जोशी बम्बई सभ्य-समाज की राधिका थी। थी तो वह एक छोटी-सी कन्या-पाठशाला की अध्यापिका पर उसका ठाट-बाट, मान-सम्मान बड़ी-बड़ी धन-रानियों को भी लज्ज...

2016

EN

मानसरोवर - भाग 2कुसुमखुदाई फौजदारवेश्याचमत्कारमोटर के छींटेकैदीमिस पद्माविद्रोहीकुत्सादो बैलों की कथारियासत का दीवानमुफ्त का यशबासी भात में खुदा का साझादूध का दामबालकजीवन का शापडामुल का कैदीनेउरगृह-नीतिकानूनी कुमारलॉटरीजादूनया विवाहशूद्र---------साल-भर की बात है, एक दिन शाम को हवा खाने जा रहा था कि महाशय नवीन से मुलाक़ात हो गयी। मेरे पुराने दोस्त हैं, बड़े बेतकल्लुफ़ और मनचले। आगरे में मकान है, अच्छे कवि हैं। उनके कवि-समाज में कई बार शरीक हो चुका हूँ। ऐसा कविता का उपासक मैंने नहीं देखा। पेशा ...

2016

EN

दूध का दामअब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और जच्चेखानों में सुधार की आवश्यकता को मानते थे, लेकिन इसमें जो बाधाएँ थीं, उन पर कैसे विजय पाते ? कोई नर्स देहात में जाने पर राजी न हुई और बहुत कहने-सुनने से राजी भी हुई, तो इतनी लम्बी-चौड़ी फीस माँगी कि बाबू साहब को सिर झुकाकर चले आने के ...

2016

EN

मनोवृत्तिएक सुंदर युवती, प्रात:काल, गाँधी-पार्क में बिल्लौर के बेंच पर गहरी नींद में सोयी पायी जाय, यह चौंका देनेवाली बात है। सुंदरियाँ पार्कों में हवा खाने आती हैं, हँसती हैं, दौड़ती हैं, फूल-पौधों से खेलती हैं, किसी का इधर ध्यान नहीं जाता; लेकिन कोई युवती रविश के किनारे वाले बेंच पर बेखबर सोये, यह बिलकुल गैर मामूली बात है, अपनी ओर बल-पूर्वक आकर्षित करने वाली। रविश पर कितने आदमी चहलकदमी कर रहे हैं, बूढ़े भी, जवान भी, सभी एक क्षण के लिए वहाँ ठिठक जाते हैं, एक नजर वह दृश्य देखते हैं और तब च...

2024

EN

"Mansarovar" is a famous collection of short stories by Munshi Premchand. The collection is highly regarded for its vivid portrayal of Indian rural life, human emotions, and social issues. It consists of eight volumes, each containing stories that delve into various aspects of life and society.Key Stories and Themes"Poos ki Raat" (A Winter Night) - This story depicts the struggles of a poor farmer who, despite his best efforts, cannot protect his crops from being destroyed b...

Price₹112.54

2016

EN

मानसरोवर - भाग 5मंदिर निमंत्रण रामलीला कामना तरु हिंसा परम धर्म बहिष्कार चोरी लांछन सती कजाकी आसुँओं की होली अग्नि-समाधि सुजान भगत पिसनहारी का कुआँ सोहाग का शव आत्म-संगीत एक्ट्रेस ईश्वरीय न्याय ममता मंत्र प्रायश्चित कप्तान साहब इस्तीफा मानसरोवर - भाग 6यह मेरी मातृभूमि है राजा हरदौल त्यागी का प्रेम रानी सारन्धा शाप मर्यादा की वेदी मृत्यु के पीछे पाप का अग्निकुंड आभूषण जुगनू की चमक गृह-दाह धोखा लाग-डाट अमावस्या की रात्रि चकमा पछतावा आप-बीती राज्य-भक्त अधिकार-चिन्ता दुराशा (प्रहसन)मानसरोवर - ...

2024

EN

"Mansarovar" is a famous collection of short stories by Munshi Premchand. The collection is highly regarded for its vivid portrayal of Indian rural life, human emotions, and social issues. It consists of eight volumes, each containing stories that delve into various aspects of life and society.Key Stories and Themes"Poos ki Raat" (A Winter Night) - This story depicts the struggles of a poor farmer who, despite his best efforts, cannot protect his crops from being destroyed b...

Price₹112.54