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2024

EN

प्रतिज्ञा: प्रेमचंद की इस साहित्यिक रचना में भारतीय समाज की गहरी समस्या, विधवा विवाह, को एक नये और मानवीय दृष्टिकोण से चित्रित किया गया है। विधुर अमृतराय की अद्वितीय प्रतिज्ञा और उसका विधवा पूर्णा के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण, समाज में परिवर्तन की आवश्यकता को उजागर करता है। इस उपन्यास के माध्यम से, प्रेमचंद ने न केवल समाज की कठोरताओं और विरोधाभासों का उन्मोचन किया है, बल्कि समस्याओं के नवीन समाधान का भी आग्रह किया है। Pratigya: Navigate complex moral dilemmas, choices and their conseq...

PriceS$ 0.71 SGDor Free with Kobo Plus

2018

EN

गरीब और ग्रामीण भारत को जितना अच्छा प्रेमचंद ने अपने शब्दों में व्यक्त किया है, हिंदी जगत में उसका कोई दूसरा उदाहरण मिलना नामुमकीन है. गांव के व्यक्ति की खुशियों और व्यथाओं का प्रेमचंद जितना मार्मिक चित्रण कोई दूसरा भारतीय लेखक कर ही नहीं पाया है. उनकी किताब पूस की रात भी एक गरीब व्यक्ति पर पड़ने वाली मौसम की मार को रेखांकित करता है. किताब में सर्दी का ऐसा अनुपम वर्णन मिलता है कि पाठक को भी ठंड का आभास होता है. सबसे अच्छी बात यह है कि वह किरदार के साथ जुड़ता है और उसके दर्द को महसूस करता ह...

PriceS$ 13.70 SGDor Free with Kobo Plus

2024

EN

मनोरमा: प्रेमचंद के इस गहरे सामाजिक उपन्यास में, रानी मनोरमा के जीवन के माध्यम से उस समय की नारी व्यथा को उजागर किया गया है। जानिए कैसे प्रेमचंद ने इन संघर्षों और दुःखों को संवेदनशीलता और गहराई के साथ व्यक्त किया। यह पुस्तक आपको उस युग में नारी जीवन के जटिल पहलुओं से परिचित कराती है। प्रेमचंद की अद्वितीय लेखनी ने एक बार फिर नारी व्यथा और समाजिक मुद्दों को उजागर करते हुए मनोरमा के पात्र में जीवन दिया है। इस उपन्यास के माध्यम से, प्रेमचंद ने एक अद्वितीय झलक प्रस्तुत की है जो उस समय की महिलाओ...

PriceS$ 0.71 SGDor Free with Kobo Plus

2016

EN

मानसरोवर - भाग 5मंदिर निमंत्रण रामलीला कामना तरु हिंसा परम धर्म बहिष्कार चोरी लांछन सती कजाकी आसुँओं की होली अग्नि-समाधि सुजान भगत पिसनहारी का कुआँ सोहाग का शव आत्म-संगीत एक्ट्रेस ईश्वरीय न्याय ममता मंत्र प्रायश्चित कप्तान साहब इस्तीफा मानसरोवर - भाग 6यह मेरी मातृभूमि है राजा हरदौल त्यागी का प्रेम रानी सारन्धा शाप मर्यादा की वेदी मृत्यु के पीछे पाप का अग्निकुंड आभूषण जुगनू की चमक गृह-दाह धोखा लाग-डाट अमावस्या की रात्रि चकमा पछतावा आप-बीती राज्य-भक्त अधिकार-चिन्ता दुराशा (प्रहसन)मानसरोवर - ...

PriceS$ 8.82 SGDor Free with Kobo Plus

2016

EN

दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्पन्न हुई : मैं अपने स्थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा तो वे ध्यान-मग्न सिर नीचा किए हुए कुछ सोच रहे थे। मुझे देखकर कुछ आश्चर्य नहीं हुआ; क्योंकि यह कोई नई बात नहीं थी। उन्हें थोड़े ही दिन पूरब से इस देश मे आए हुआ है। नगर में उनसे मेरे सिवा और किसी से विशेष जान-पहिचान नहीं है; और न वह विशेषत: किसी से मिलते-जुलते ही हैं। केवल मुझसे मेरे भाग्य से, वे मित्र-भाव रखते हैं। उदास तो वे हर समय रहा करते हैं। क...

PriceS$ 1.38 SGDor Free with Kobo Plus

2014

EN

होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा - गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले पाथ कर आई थी। बोली - अरे, कुछ रस-पानी तो कर लो। ऐसी जल्दी क्या है? होरी ने अपने झुर्रियों से भरे हुए माथे को सिकोड़ कर कहा - तुझे रस-पानी की पड़ी है, मुझे यह चिंता है कि अबेर हो गई तो मालिक से भेंट न होगी। असनान-पूजा करने लगेंगे, तो घंटों बैठे बीत जायगा। 'इसी से तो कहती हूँ, कुछ जलपान कर लो और आज न जाओगे तो कौन हर...

PriceS$ 2.54 SGD

2016

EN

मैकूलाल अमरकान्त के घर शतरंज खेलने आये, तो देखा, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहे हैं। पूछा-कहीं बाहर की तैयारी कर रहे हो क्या भाई? फुरसत हो, तो आओ, आज दो-चार बाजियाँ हो जाएँ।अमरकान्त ने सन्दूक में आईना-कंघी रखते हुए कहा-नहीं भाई, आज तो बिलकुल फुरसत नहीं है। कल जरा ससुराल जा रहा हूँ। सामान-आमान ठीक कर रहा हूँ।मैकू-तो आज ही से क्या तैयारी करने लगे? चार कदम तो हैं। शायद पहली बार जा रहे हो?‘अमर-हाँ यार, अभी एक बार भी नहीं गया। मेरी इच्छा तो अभी जाने को न थी; पर ससुरजी आग्रह कर रहे हैं।मैकू-...

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2013

EN

Godan, a story of stark realism is Premchand’s most outstanding work. It is his last completed novel which brings out the realistic interpretation of Indian village society. This is a story of people, hungry and semi starved, yet hopeful and optimistic in the truest spirit of the age it represent.

PriceS$ 4.25 SGD

2016

EN

मानसरोवर - भाग 1अलग्योझाईदगाहमाँबेटोंवाली विधवाबड़े भाई साहबशांतिनशास्वामिनीठाकुर का कुआँघर जमाईपूस की रातझाँकीगुल्ली-डंडाज्योतिदिल की रानीधिक्कारकायरशिकारसुभागीअनुभवलांछनआखिरी हीलातावानघासवालीगिलारसिक संपादकमनोवृत्ति--------------------भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। चैन से गाँव में गुल्ली-डंडा खेलता फिरता था। माँ के आते ही चक्की में जुतना पड़ा। पन्ना रुपवती स्त्री थी और रुप और गर्व म...

PriceS$ 4.17 SGDor Free with Kobo Plus

2016

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ईदगाहरमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गाँव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियाँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं है, पड़ोस के घर में सुई-धागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैं, उनमें तेल डालने के लिए तेली के घर पर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी बैलों को सा...

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2016

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बेटोंवाली विधवापंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की क्वाँरी थी। संपत्ति भी काफी छोड़ी थी। एक पक्का मकान, दो बगीचे, कई हजार के गहने और बीस हजार नकद। विधवा फूलमती को शोक तो हुआ और कई दिन तक बेहाल पड़ी रही, लेकिन जवान बेटों को सामने देखकर उसे ढाढ़स हुआ। चारों लड़के एक-से-एक सुशील,चारों बहुएँ एक-से-एक बढ़कर आज्ञाकारिणी। जब वह रात को लेटती, तो चारों बारी-बारी से उसके पाँव दबातीं; वह स्ना...

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2016

EN

चमत्कारबी.ए. पास करने के बाद चन्द्रप्रकाश को एक टयूशन करने के सिवा और कुछ न सूझा। उसकी माता पहले ही मर चुकी थी, इसी साल पिता का भी देहान्त हो गया और प्रकाश जीवन के जो मधुर स्वप्न देखा करता था, वे सब धूल में मिल गये। पिता ऊँचे ओहदे पर थे, उनकी कोशिश से चन्द्रप्रकाश को कोई अच्छी जगह मिलने की पूरी आशा थी; पर वे सब मनसूबे धरे रह गये और अब गुजर-बसर के लिए वही 30) महीने की टयूशन रह गई। पिता ने कुछ सम्पत्ति भी न छोड़ी, उलटे वधू का बोझ और सिर पर लाद दिया और स्त्री भी मिली, तो पढ़ी-लिखी, शौकीन, जबा...

PriceS$ 1.38 SGDor Free with Kobo Plus